Kisi Ko Bhi Hazir Karne Ka Amal


हर व्यक्ति के मन में एक अद्भुत चमत्कारी शक्ति होती है। उसमें छिपी गजब की क्षमता कीे बदौलत किसी भी अनजान शक्ति को अपने वश में किया जा सकता है। किंतु इसके लिए कुछ वैसी ताकतों को बुलाया जाना जरूरी होता है,

जो इंसानी दुनिया से बिल्कुल ही अलग की अलौकिक दुनिया में एक छाया की तरह होते हैं। उन्हें एक ताकतवर परछाई कहें या कहें उनके भीतर आपार ऊर्जा का विपुल भंडार होता है। वह अदृश्य होकर भी हर संभव शक्तिशाली काम कर देता है।

वे मुस्लिम समाज में एक छाया के तौर पर शैतान की बेटी, जिन्नात या परियों के नाम से जानी जाती हैं। यानी कि उसी छाया की बदौलत ही मन की शक्ति हासिल की जा सकती है, जो बेहद कठोर साधना और अल्लाह के अमल से मिलता है। उ

से फारसी शब्द ‘हमजाद के अमल’ के नाम से भी जाना जाता है। उनका सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे किसी व्यक्ति का वशीकरण करने, शत्रु के प्रभाव को खत्म करने, दूसरों के मन की बात को जानने या फिर किसी को डराने-धमकाने के लिए उपयोगी हो सकता है।

ऐसी जिस अदृश्य शक्ति का इस्तेमाल इंसानी भलाई के लिए किया जाता है वैसी हमजाद को नुारानि कहा गया है, जबकि नकारात्मक शक्तियों की जिम्मेदार बुराई या शैतानी हमजाद को सिफलि कहा जाता है।

इनसे भले ही शैतानी काम लिया जाता हो, लेकिन इनकी मदद से ही दुश्मनों के बुरे-से-बुरे काम को नेस्तनाबुद किया जा सकता है। इन्हें हाजिर करने के लिए र्कुआन की आयतों को मौलवी द्वारा बताए गए नियमों के मुताबिक कायदे से पढ़ने का अमल किया जाता है।

शैतान की बेटी को हाजिर करने का अमल

शैतान की बेटी को हाजिर करने का अमल – Shaitan Ki Beti Ko Hazir Karne Ka Amal, Dua, Wazifa, अलौकिक ताकतवर शक्तियों मंे शैतान की बेटी को हाजिर करने के अमल को सात दिनों तक किया जाता है। ऐसा कर उसकी शक्ति को साध लिया जाता है।

शौतान की बेटी एक तरह से जिन्न ही है, जिनकी नकारात्मक क्षमता से बुराई को खत्म किया जा सकता है। वैसे किसी को भी हाजिर करने के अमल की दुआ के लिए पढ़ा जाने वाला आयत है-

लाइलाहा इल्ला अनता सुबहानका इन्नि कुंतु मिन्ज जावाल्लिन।

Shaitan Ki Beti Ko Hazir Karne Ka Amal

मौलवी की सलाह के अनुसार इसे बेहद सुकून वाले जगह में 777 बार सात दिनों तक पढ़ा जाना चाहिए। हर दिन एक निश्चित समय में प्रातः नौ बजे तक या फिर रात्री मंे नौ बजे के बाद पढ़ना चाहिए।
अपने शरीर पर 11 बार आयतल कुर्सी को पढ़कर फूंक लेना भी बेहतर होगा।
इसके पहले और आखिर में 11-11 बार दुरूद इब्राहिम को पढ़ना जरूरी है।
यह सब हर दिन आंखें बंदकर किया जाना चाहिए। इसकी मियाद पूरी होने के दिन आंखों के सामने एक स्पष्ट इंसानी छाया उभरेगी, जो एक खूबसूरत युवती की होगी। वह हर आदेश का पालन करने के लिए बदले की भावना लिए हुए तत्पर रहेगी।
उभरती हुई तस्वीर के साथ सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू होेने पर अपना मनोवांछित प्रयोग कर सकते हैं।
उस तस्वीर को अपने समाने जलती हुई मोमबत्ती की लौ या शीश में भी देखी जा सकती है।

जिन्नात को हाजिर करने का अमल

जिन्नात को हाजिर करने का अमल – Jinnat Ko Hazir Karne Ka Amal, Dua, Wazifa, अच्छे काम करने, किसी मुसीबत से छुटकारा पाने, या फिर किसी को वशीभूत करने की महत्वाकांक्षा पूरी करने वाले व्यक्ति को पहले जिन्नात हाजिर करने का अमल करना जरूरी होता है।

इसके लिए र्कुआन में दिए गए आयत

‘‘लाकुन्ना हुआल्लाहु रब्ब नला उसरीकु बिरब्बि अहद’’

का 40 दिनों के भीतर अमल पूरा कर लेना चाहिए। इसकी तरकीब इस तरह बताई गई है-

Jinnat Ko Hazir Karne Ka Amal

अमल करने से एक दिन पहले आयत पढ़ने संबंधी मन के भीतरी भय को दूर कर हिम्मत जुटानी है। इस दौरान आयत को कंठस्थ कर लेना चाहिए।
इस अमल को करने में कुल छह घंटे का समय लग सकता है, इसलिए जुमेरात की रात को 11 बजे के बाद घर के एकांत कमरे का चयन करें और नया सफेद पोशाक पहनें।
अपने साथ सुगंधित फूल और इत्र की शीशी भी रखें। दुर्गंध वाली किसी भी चीज को हटा दें और वजू करने के बाद सफेद चादर बिछाकर बैठ जाएं।
अमल की शुरूआत करने से पहले दो रकत नमाज अदा करें। प्रत्येक रकत में सुराह फतेहा या सुरात नसह को दस बार पढ़ें।
फिर चार आयतालकुर्सी को एक बार पढ़ें और एक कांच के हरे रंग की चूड़ी पर तीन बार दम करें। उसी चूड़ी से अपने चारो ओर एक दायरे बना लें।
ऊपर बताए गए आयत को सवा लाख बार पढ़ना है। इसे हर दिन जितना अधिक पढ़ा जाएगा, वह उतना ही जल्द निर्धारित मियाद में अमल पूर हो पाएगा।
अमल के खत्म हो जाने के बाद नजरों के सामने जिन्न एक साक्षात स्त्री की छाया के रूप में दिखेगी। अदब के साथ दुआ करगी। उसके ऐसा करते ही आप उससे वादा लें कि आपके द्वारा बुलाए जाने वाह आपकी खिदमत में हाजिर हो जाए। यह कहते हुए उसके बाद इत्र की शीशी से गिराकर फैला दें।

परियों को हाजिर करने का अमल

परियों को हाजिर करने का अमल – Pariyon Ko Hazir Karne Ka Amal, Dua, Wazifa, बच्चों की किस्से-कहानियों में जादूई चमत्कार करने वाली परी को देखने और दोस्ती करने की तमन्ना हर किसी को होती है। क्या आप जानते हैं कि उसे इस्लामी इबादत और अमल के जरिए नेक-नियत वाली परियों को हाजिर किया जा सकता है।

उससे बातें की जा सकती है और उसकी मदद से अपनी समस्याओं को समाधान पाया जा सकता है। इस अमल को कायदे से करने की तरकीब इस प्रकार है-

Pariyon Ko Hazir Karne Ka Amal

इस अमल के लिए नौचंदी की इतवार या जुमेरात का या फिर बुधवार का दिन निर्धारित करें। पाक-साफ होकर सुबह नौ बजे के करीब सफेद पोशाक धारण करें।
बेहतरीन खुशबू लगाएं और एकांत जगह पर सफेद चादर बिछाएं। अपने साथ दो गेहूं के आटे की रोटी और दो बेसन के लड्डूओं को अपने सामने रखें।
संदल की अगरबत्ती जलाएं। शुरूआत दो रकत की नमाज से करते हुए 11 बार दुरूद शरीफ पढ़ें। उसके बाद 1000 मरतबा सुराह फतेह पढ़ें। फिर दुरूद शरीफ 11 बार पढ़कर अंत में खाने की वस्तुओं पर फूंक मारें।
आंखें बंद कर परियों का तस्सबुर करें। चंद लम्हे में आप पाएंगे कि वे आपकी आखों के सामने आ चुकी हैं। उनकी सलामती की बात करते हुए बुलाने पर आने का वादा लें। उन्हें अपना हाल-ए-दिल सुनाते हुए महत्वाकांक्षाओं के बारे में भी बताएं।
रोटियों को टुकड़ कर लड्डुएं के साथ बच्चों के बीच बांट दें।

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